पौष पूर्णिमा स्नान पर्व के बाद अब मंगलवार को महाकुंभ का महास्नान शुरू हो चुका मकर संक्रांति पर सबसे पहले अखाड़ों ने अमृत स्नान किया संगम तट पर देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई पहले अमृत स्नान में करीब ढाई करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान महाकुंभ मेला प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने महाकुंभ मेला पर कहा, “13 में से 8वें अखाड़े का अभी स्नान चल रहा है पुलिसबल तैनात है जिससे साधु-संतों के स्नान में कोई बाधा न आए 12 बजे तक 1 करोड़ 60 लाख लोगों द्वारा स्नान किया जाना संभावित आज स्नान के बाद से अन्य धार्मिक स्थलों पर लोग जाने की संभावना है, उसकी तैयारी भी कर ली गई हैं हम लगातार स्थिति पर नजर रख रहे पुलिस प्रतिक्रिया वाहन और एम्बुलेंस मौके पर मौजूद थे थर्मल इमेज के जरिए हम रात के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने में सफल रहे मकर संक्रांति के अवसर पर राज्य में कई जगहों पर श्रद्धालु शांतिपूर्वक पवित्र स्नान कर रहे हैं। हमारे लिए ये चुनौती नहीं अवसर है, 3 हजार से अधिक ट्रेन रेलवे विभाग द्वारा चलाए जा रहे हैं।’ वहीं लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के कारण प्रयागराज जंक्शन फुल हो गया लीडर रोड से लेकर हीवेट रोड तक श्रद्धालुओं की कतार लग गई है। सिविल लाइंस बस स्टैंड पर यात्रियों की भीड़ भरी हुई है पुलिस ने श्रद्धालुओं को प्रयागराज जंक्शन की तरफ मोड़ दिया डायवर्जन के बावजूद श्रद्धालुओं की भीड़ कंट्रोल न होने पर प्रयागराज जंक्शन के गेट बंद कर दिए गए हैं श्रद्धालु बंद गेट खोलने को लेकर हंगामा कर रहे है।

नागवासुकी मंदिर और संगम क्षेत्र में तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया बुजुर्ग, महिलाएं और युवा, सभी अपने सिर पर गठरी लादे आस्था से भरे हुए संगम की ओर बढ़ते दिखे स्नान के लिए श्रद्धा ऐसी थी कि लोग रात से ही गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाना शुरू कर चुके थे महाकुम्भ नगर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हर मार्ग पर बैरिकेडिंग लगाकर वाहनों की गहन जांच की गई। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती से पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा डीआईजी कुम्भ मेला वैभव कृष्ण, एसएसपी राजेश द्विवेदी समेत पुलिस टीम ने घोड़े के साथ मेला क्षेत्र में पैदल मार्च किया और अमृत स्नान जा रहे अखाड़ा साधुओं का मार्ग प्रशस्त किया।
12 किलोमीटर क्षेत्र में फैले स्नान घाटों पर हर हर महादेव और जय श्री राम के जयघोष सुनाई दिए। साधुओं के अमृत स्नान के साथ ही आम श्रद्धालुओं ने भी अपनी आस्था की डुबकी लगाई। संगम के आसपास गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ चारों ओर से देखी गई इस दौरान सभी ने हर हर महादेव और जय श्री राम के नारों से संगम क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया सोमवार शाम से ही महाकुंभ नगर में जन ज्वार आने लगा था, जिसका क्रम देर रात तक चलता रहा सोमवार को हुए पौष पूर्णिमा पर डुबकी लगाने वाले ज्यादातर श्रद्धालु भी अमृत स्नान करने रुक गए मकर संक्रांति के महास्नान की पूर्व संध्या पर ही प्रयागराज शहर और महाकुंभ नगर के मार्ग चहुंदिश श्रद्धा पथ में बदल चुके थे देश-दुनिया से संतों, श्रद्धालुओं, पर्यटकों का सागर उमड़ा तो उनके कदम घाटों की ओर ही था। लगभग 12 किमी में फैले 44 स्नान घाटों पर आधी रात के बाद ही भारी भीड़ पहुंच चुकी थी पवित्र त्रिवेणी के तट पर कहीं तिल रखने भर की जगह नहीं बची थी।
जय श्रीराम, जय गंगा मैया और हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष के बीच कोई हाथों में ध्वज लिए संगम की ओर दौड़ लगा रहा था तो कोई दंड-कमंडल, मनका लिए हुए लपकते पांवों से बढ़ता रहा मेला प्रशासन का अनुमान है कि पहले राजसी स्नान पर्व पर ढाई करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु संगम में पुण्य की डुबकी लगाएंगे संगम तट पर मकर स्नान के लिए घाटों पर श्रद्धालु पहुंच चुके थे। भीड़ प्रबंधन के चलते छह से सात किमी पहले ही वाहनों को रोक दिए जाने की वजह से सड़कें हर तरफ पैदल पथ में तब्दील हो गईं थीं। सिर पर गठरी, कंधे पर झोला, हाथों में बच्चों और महिलाओं का हाथ थामे लोग संगम तट की ओर लंबे डग भरते रहे फाफामऊ से अरैल के बीच दोनों तटों पर बने 44 स्नान घाटों पर बिछे पुआल पर दूर-दराज से आए श्रद्धालु स्नान की प्रतीक्षा कर रहे थे। पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार मकर संक्रांति पर स्नान के बाद दान जरूर करना चाहिए इसमें गरीब व्यक्ति को भोजन कराना चाहिए साथ ही कंबल, खिचड़ी, तांबा, स्वर्ण का दान करना चाहिए। लोहा व उड़द का दान नहीं करना चाहिए इसका दान वर्जित है।