अयोध्या-काशी पूरी, मथुरा-नैमिष पर काम जारी ; योगी बोले

सीएम योगी तपोधाम आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए यहां उन्होंने तपोधाम आश्रम में गोरख अमृत धारा फव्वारे और सेवाभारती सभागार का लोकार्पण किया इस मौके पर सीएम ने कहा किअयोध्या-काशी पूरी हो चुकी है। मथुरा-नैमिष पर काम जारी है। पाकिस्तान में हिंगलाज देवी की स्थिति पर भी हमें सोचना होगा

सीतापुर ; सीएम योगी आदित्यनाथ सोमवार की दोपहर करीब 2 बजे यूपी के सीतापुर पहुंचे यहां उनका हेलीकॉप्टर जीआईसी स्थित हेलीपैड पर उतरा वहां से उनकी फ्लीट करीब एक किमी दूर स्थित तपोधाम आश्रम पहुंची उनका काफिला रूट की संकरी गलियों के बीच से गुजरा इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था में 1700 पुलिसकर्मी तैनात रहे तपोधाम आश्रम में महंत तेजनाथ महाराज समेत अन्य लोगों ने सीएम का स्वागत किया यहां सबसे पहले उन्होंने गोरख अमृत धारा फव्वारे का लोकार्पण किया साथ ही श्री सिद्ध तीर्थ तपोस्थली बाबा गिरधारी नाथ महाराज के संदेश के शिलापट का लोकार्पण किया इसके बाद आश्रम में पूजन-अर्चन किया इस मौके पर सीएम ने सबसे पहले तपोधाम आश्रम में मूर्ति स्थापना और भंडारा कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का स्वागत किया। नाथपंत से जुड़े पूज्य संतजनों को नमन करते हुए योगी तेजनाथ महाराज को धन्यवाद दिया उन्होंने अपनी पूज्य गुरु परंपरा का भी स्मरण किया कहा कि उनके दादा गुरु ने इस आश्रम की स्थापना की थी। आजादी के समय पाकिस्तान छोड़कर इस देश में अपनी साधना को पुख्ता करने के लिए योगीराज गिरधारी महाराज ने जो साधना की थी, उनकी साधना गुफा को एक भव्य रूप देकर हमें उससे जोड़ने का अवसर दिया है। इसके लिए उन्हें बधाई देता हूं। सीएम ने कहा कि  इस स्थान पर योगी गिरधारीनाथ महाराज ने वर्षों तक साधना की उनके बाद उनके शिष्य योगी राजचरण नाथ महाराज ने इस आश्रम को आगे बढ़ाया गुरु शिष्य की वो परंपरा आज भी स्वतंत्र भारत में देश के अंदर आकर अपनी परंपरा और विरासत को अक्षुण बनाए रखने के लिए जुटी है। यह अभिनंदनीय प्रयास है। जैसे पूर्वी भारत में कामाख्या शक्तिपीठ का महत्व है। ऐसे ही पश्चिमी भारत में हिंगलाज देवी धाम का महत्व है। दुर्भाग्य से पाकिस्तान में वो स्थान जाने के कारण कई भक्तों को वहां जाने का सौभाग्य नहीं प्राप्त हो पाता है। वह एक शक्तिपीठ है।

CM Yogi will reach Sitapur to attend program organized at Tapodham Ashram
उन्होंने कहा कि इन सभी पीठों को योगीराज गोरक्षनाथ का स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान है। सीतापुर में भी यह कार्यक्रम हुआ है। सीतापुर यूं ही गिरिधारी नाथ महाराज की तपोस्थली नहीं बनी यह पौराणिक केंद्र है। भारत के वैदिक ज्ञान को लिपिबद्ध करने का स्थल है। हमने नैमिषारण्य को पुनर्स्थापित करने के बड़े कार्यक्रम को अपने हाथों में लिया है। जहां 88 हजार ऋषियों ने अनवरत एक जगह एकत्र होकर भारत के सभी पुराणों को लिपिबद्ध किया उससे पहले श्रीमद्भागवत की रचना हो चुकी थी। शेष की रचना की पवित्र स्थली नैमिषारण्य है। ऐसे ही एक सिद्ध साधक हिंगलाज देवी के स्थान से यहां आए। उनको एक ऐसा स्थान चाहिए था, जहां उनको कोई पहचानता न हो ईश्वर की प्रेरणा से योगी गिरीनाथ महाराज ने गुफा बनाकर यहां तप किया सीएम ने कहा कि दुनिया के अंदर सभी सभ्यता व संस्कृति समाप्त हो गईं लेकिन, भारत की संस्कृति व सनातन धर्म दुनिया को आज भी वसुधैव कुटुंबकम का संदेश दे रही है। इसे तोड़ने के कई प्रयास हुए सनातन धर्मावलम्बियों ने इसकी रक्षा की
धर्म ने सबको आगे बढ़ने की जगह दी।
हर एक को शरण दी, लेकिन बदले में विदेशी आक्रांताओं ने इस पर आक्रमण किया। याद करिए जिसको भी अवसर मिला, अकेले दुनिया के अंदर सनातन धर्मावलंबी हैं। इनके पास बल, बुद्धि थी, लेकिन सिर्फ उपयोग मानवता के कल्याण के लिए किया। धर्म ने सदा उदार चरितानां वसुधैव कुटुंबकम का हमेशा संदेश दिया। हमने हमेशा चराचर जगत के कल्याण की बात की उन्होंने कहा कि कितना भी जहरीला सांप हो नागपंचमी को उसको भी लोग दूध और बताशा खिला देते हैं। जो भी शरण मांगने आया, उसे शरण मिली। लेकिन, यहां शरण लेने के बाद शरणार्थी के धर्म का निर्वहन नहीं किया हाथ की उंगली पकड़कर बाद में गला दबाने का काम किया देश को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य का शासन देश का स्वर्ण युग है।
CM Yogi will reach Sitapur to attend program organized at Tapodham Ashram
सीएम ने आगे कहा कि भारत के पास दुनिया के अर्थतंत्र का 45 फीसदी हिस्सा था। भारत दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत थी। हमले होते गए। जब टूट-फूट शुरू हुई, हम आपस में बंटते गए मत, संप्रदाय, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर बंटवारा हुआ। ये हमले बढ़ते गए, लूटपाट बढ़ती गई। लगातार ये चलता रहा। आज से 400 वर्ष पहले तक दुनिया की अर्थव्यवस्था में भागीदारी सबसे अधिक थी। भारत नंबर एक पर था। नंबर दो पर चीन था। भारत को उस प्रकार का नेतृत्व नहीं मिल पाया था। जो समृद्धि को और तीव्र कर सके। जो देश अपने सांस्कृतिक मूल्यों से भटक जाए। महापुरुषों पर गौरव की अनुभूति नहीं करता है। उसका न तो वर्तमान सुरक्षित होता है और न भविष्य सुरक्षित होता है। उन्होंने कहा कि चीन बढ़ रहा था, लेकिन भारत को आगे बढ़ाने का उस कालखंड में प्रयास नहीं हो पाया मुगलों ने तो लूटा ही था, अंग्रेजों ने भी आश्रम पद्धति और किसानों पर प्रहार किया किसानों को कर्जदाता बनाया हमारा हस्तशिल्प कारीगर बेरोजगार हो गया देश दिग्भ्रम की स्थिति में आ गया। एक ऐसे चौराहे पर हम खड़े थे, जहां पर हर व्यक्ति किंकर्तव्य विमूढ़ था। जब देश 1947 में आजाद हुआ तो भारत की अर्थव्यवस्था मात्र विश्व की दो फीसदी हो गई अपने पिछले 11 वर्षों में भारत के विकास को देखा है। जब भारत की संस्कृति के साथ समृद्धि की चिंता चलती है तो परिणाम आते हैं। प्रधानमंत्री के 11 वर्ष के कार्यकाल में हमने विकास देखा। भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रही है। भारत ने अपने मूल्यों व आदर्शों को पहचाना है। स्वतंत्र भारत में पहली बार इन स्थलों को सम्मान प्राप्त हो रहा है।

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