मौलाना जर्जिस अंसारी ने झारखंड में कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को पक्का मुसलमान पांच वक्त का नमाजी बताया था।वायरल वीडियो में मौलाना जर्जिस अंसारी श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की व्याख्या कर दावा करते दिखाई दे रहे हैं

लखनऊ ; भगवान श्रीकृष्ण के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में इटावा के मौलाना जर्जिस अंसारी के खिलाफ हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने यह एफआईआर दर्ज कराई है। महासभा के कार्यकर्ताओं ने थाने पर प्रदर्शन कर मौलाना की गिरफ्तारी की मांग की पुलिस ने उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया मौलाना जर्जिस अंसारी ने झारखंड में कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को पक्का मुसलमान पांच वक्त का नमाजी बताया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आरोप है कि मौलाना ने सनातन धर्म का अपमान कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि मौलाना पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और आईटी एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

झारखंड में आयोजित एक धार्मिक सभा में मौलाना जर्जिस अंसारी का एक वीडियो वायरल होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में मौलाना ने श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के दसवें श्लोक का हवाला देते हुए दावा किया है कि भगवान श्रीकृष्ण पांचों वक्त की नमाज पढ़ते थे।
23 जून का बताया जा रहा है यह वीडियो
इटावा के बाह अड्डा निवासी मौलाना जर्जिस अंसारी का भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम को लेकर दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो झारखंड में 23 जून को आयोजित एक धार्मिक सभा का है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में मौलाना जर्जिस अंसारी श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की व्याख्या कर दावा करते दिखाई दे रहे हैं कि उसमें वर्णित ध्यान और साधना का आशय नमाज से है। वीडियो में वह भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि वह पांचों वक्त नमाज पढ़ते थे। भगवान श्रीराम के बारे में भी इसी प्रकार का दावा किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद कई संतों, धार्मिक संगठनों और हिंदू संगठनों ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस प्रकार की टिप्पणियां सनातन आस्था का अपमान हैं और सामाजिक व सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं।