सुरीर के बघा मोहल्ले में महिलाएं करवा चौथ का व्रत नहीं रखतीं हैं। सैकड़ों वर्ष पूर्व एक सती के श्राप के डर से यह परंपरा चली आ रही है।
मथुरा ; देश-विदेश में हिंदू महिलाएं अपने पतियों की दीर्घायु के लिए 29 अक्तूबर को करवा चौथ का व्रत रखेंगी। इस व्रत को लेकर नवविवाहिताओं में खासा उत्साह है। बाजार में खरीदारी के लिए रौनक बढ़ गई है। गांव-गांव फेरी लगाने वाले श्रृंगार का सामान बेच रहे हैं। दूसरी ओर मथुरा की मांट तहसील के कस्बा सुरीर के बघा मोहल्ला में कोई रौनक नहीं है। यहां महिलाएं सती के श्राप के डर से करवा चौथ का व्रत नहीं रखती हैं। बुजुर्गों के अनुसार, सैकड़ों वर्ष पहले थाना नौहझील के गांव रामनगला का एक ब्राह्मण युवक अपनी पत्नी को विदा कराकर लौट रहा था। सुरीर के बघा मोहल्ले के ठाकुर समाज के लोगों से गाड़ी में जुते भैंसे को लेकर विवाद हो गया। इस झगड़े में ब्राह्मण युवक की मौत हो गई उस दिन करवा चौथ थी। ब्राह्मण की पत्नी ने श्राप दिया कि यहां की कोई महिला व्रत रखेगी तो वह उसी की तरह विधवा हो जाएगी। इतना कहकर महिला अपने पति के साथ सती हो गई।
परंपरा का प्रभाव
चर्चा है कि अगली करवा चौथ पर जिन महिलाओं ने व्रत रखा, वे सभी विधवा हो गईं बुजुर्गों ने सती से क्षमा याचना की और मोहल्ले में सती का मंदिर बनवाया आज भी पति व पुत्रों की सलामती के लिए यहां कोई महिला करवा चौथ या अहोई अष्टमी का व्रत नहीं रखती वृद्धा सुनहरी देवी का कहना है कि ब्राह्मण समाज के लोग आज भी सुरीर का पानी नहीं पीते हैं।

