सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजट आने से पहले और बाद में अमेरिका के साथ हुई ‘डील’ को लेकर सरकार पर हमला बोला उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने कई देशों के साथ फ्री ट्रेड डील करने का दावा किया है, लेकिन अब सवाल यह है कि कितने देश बचे हैं जिनसे ऐसी डील नहीं हुई है।

आवाज़ -ए -लखनऊ ; सन्तोष सिंह
लखनऊ ; समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा में बजट पर बोलते हुए सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने अमेरिका के साथ हुए कथित ‘डील’ और बजट की प्राथमिकताओं पर सरकार को घेरा यादव ने कहा कि यह ‘डील’ नहीं बल्कि ‘ढील’ साबित हुई है, जिसका देश की अर्थव्यवस्था और किसानों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा अखिलेश यादव ने बजट आने से पहले और बाद में अमेरिका के साथ हुई ‘डील’ को लेकर सरकार पर हमला बोला उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने कई देशों के साथ फ्री ट्रेड डील करने का दावा किया है, लेकिन अब सवाल यह है कि कितने देश बचे हैं जिनसे ऐसी डील नहीं हुई है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इस ‘डील’ के बाद रुपये की स्थिति क्या होगी और पूछा कि अगर यही डील करनी थी तो पहले क्यों नहीं की गई। उनके अनुसार, यह ‘डील’ देश के लिए कोई बड़ा लाभ नहीं बल्कि एक प्रकार की ‘ढील’ है, जिससे देश को यह तय करना होगा कि 18 बड़ा है या जीरो, और बजट पहले बना या डील पहले हुई।
बजट की दिशाहीनता और उपेक्षित वर्ग
यादव ने वर्तमान बजट को दिशाहीन बताते हुए कहा कि इसमें गरीब, पिछड़े और दलित वर्ग के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने बड़े बजट लाए जा रहे हैं, तो भी प्रति व्यक्ति आय क्यों नहीं बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से फ्री राशन पाने वाले लोगों की प्रति व्यक्ति आय बताने की मांग की, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए बजट में किसी खास योजना का उल्लेख न होने पर भी अखिलेश यादव ने असंतोष व्यक्त किया उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से प्रधानमंत्री होने के बावजूद, भारत सरकार के बजट से कोई भी एक्सप्रेसवे नहीं बना है। जो एक्सप्रेसवे बने भी हैं, वे ‘विकसित भारत’ की गुणवत्ता के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार पर भी सवाल उठाया और अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर बन रहे एक्सप्रेसवे का नाम बदले जाने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बस कागजों पर ही बन रहा है। ‘किसानों की आय दोगुनी करने के सरकारी वादे पर भी अखिलेश यादव ने प्रश्नचिह्न लगाया उन्होंने कहा कि अमेरिका से हुई ‘डील’ के बाद किसानों का भविष्य अनिश्चित है, क्योंकि सब कुछ विदेश से आयात होने पर किसान क्या उगाएगा और क्या बेचेगा सरकार द्वारा एग्री इंफ्रा और मंडियों को तैयार करने की बात कहने के बावजूद, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी आज तक नहीं मिली है। उन्होंने हर्टिकल्चर क्रॉप्स और दुग्ध उत्पादन के आंकड़े गिनाने पर सरकार को घेरते हुए पूछा कि एमएसपी की गारंटी कब दी जाएगी।