पुलिस कर्मी को देखकर लोग गलत भावनाएं बनाते है परंतु आप सोचकर देखें कि उस सिपाही का भी परिवार है उसके बच्चे है मगर उच्चाधिकारी क्यों नहीं देखते कि उसकी तैनाती ऐसी जगह की जाए जो समय समय पर अपने परिवार से भी मिल सकें !
आवाज़ -ए -लखनऊ ( आर सी राठौर )
उत्तर प्रदेश में यूं तो किसी भी विषम परिस्थिति में हमारे उत्तर प्रदेश के पुलिसकर्मी घबराते नहीं पर सरकार द्वारा जो विषम परिस्थिति पैदा की जाती है उसको हमारे पुलिसकर्मी झेलने में अपने को असमर्थ पाते हैं जैसे पदोन्नति,पेंशन, आवासीय सुविधा आदि -आदि ऐसी विषम परिस्थितियों से कोई पुलिसकर्मी दो-चार नहीं होना चाहता है परन्तु ऐसा होता नहीं है एक पुलिसकर्मी के लिए विषम परिस्थिति तब उत्पन्न होती है जब नेता जी के बंगले पर उनकी सुरक्षा में पुलिसकर्मी की ड्यूटी लगाई जाती है
जो थाने में ड्यूटी करके अपराध को रोकने का काम करता हो उसको किसी नेता का गुलाम बना दिया जाए तो सिपाही के मन में क्या बीतती होगी कल्पना ही की जा सकती है,ये काम सपा, बसपा राज में ज्यादा होता था पुलिस नेताओं के दबाव में अब भी है परन्तु पहले की अपेक्षा कम है। पुलिस कर्मी को देखकर लोग गलत भावनाएं बनाते है परंतु आप सोचकर देखें कि उस सिपाही का भी परिवार है उसके बच्चे है मगर उच्चाधिकारी क्यों नहीं देखते कि उसकी तैनाती ऐसी जगह की जाए जो समय समय पर अपने परिवार से भी मिल सकें ! क्योंकि बच्चों का भविष्य सही बन सकें जिस तरह आप हम सभी लोग अपने बच्चों के भविष्य के लिए सोचते है वहीं भावनाएं उस सिपाही को भी होती है इस पर सरकार व उच्चाधिकारियों को सोचना और विचार करना चाहिए

