डीजे के दौर में अभी भी कायम फाग गायन कार्यक्रम।

बीबीपुर चिरियारी ग्राम पंचायत में आज भी पूर्वजों से चली रही आ रही परंपरा जीवित है। यहां के फाग गायन के साथ होली खेलने की परंपरा कायम है। होली के दो सप्ताह पहले से ही युवाओं की टोली घर-घर जाकर फाग गाते हैं। पूरी टीम ढोलक और झाल के साथ होली की पारंपिरक गीत गाते हैं।

आवाज़ –ए– लखनऊ ~ संवाददाता – महेन्द्र कुमार

हसनगंज (उन्नाव) – रंगों के त्योहार होली का असली आनंद ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिलता है। जब गांवों में पारंपरिक फगुआ गीतों की धुन गूंजती है, तो माहौल पूरी तरह रंगीन हो जाता है। इसी परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए ग्राम पंचायत बीबीपुर चिरियारी में भव्य फगुआ कार्यक्रम होली के आठ दिन पहले व बाद तक आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर गांव के सैकड़ों ग्रामीण एकत्र होकर पारंपरिक होली गीतों का आनंद लेते हैं।

गांव में आज भी पूर्वजों से चली रही आ रही परंपरा जीवित है। यहां के फाग गायन के साथ होली खेलने की परंपरा कायम है। होली के दो सप्ताह पहले से ही युवाओं की टोली घर-घर जाकर फाग गाते हैं। पूरी टीम ढोलक और झाल के साथ होली की पारंपिरक गीत गाते हैं। होली के गीत सुनने को लेकर लोगों की भीड़ लगी रहती है। बदलते परिवेश में बहुत कुछ बदलाव दिख रहा है, पर बीबीपुर ग्राम के युवाओं को बुजुर्गों का मिलता है सहयोग गांव के रहने वाले रमेश पासी ने बताया कि फाग गाने के लिए युवाओं की सहभागिता अधिक रहती है, इसमें बुजुर्गों का भी सहयोग रहता है। स्थानीय बुजुर्ग अपनी देखरेख में फाग गायन का कार्यक्रम आयोजित कराते हैं। फुहर गीतों पर पूरी तरह नियंत्रण रहता है। नरेश रावत ने कहा कि यहां पारंपरिक गायन की परंपरा आज भी कायम है। आधुनिकता के युग में भले हीं होली का रंग फीका होता जा रहा है, लेकिन बीबीपुर गांव में यह आज भी जीवंत है। वरिष्ठ लक्षिण पासी ने कहा कि विलुप्त होती पारंपरिक फगुआ गायन परंपरा को पुनर्जीवित करना है। और फगुआ गीतों के बिना इसकी कल्पना अधूरी मानी जाती है। आज के फाग के गायन के दौरान मयुरी रावत , डाक्टर रमेश सिंह, दिनेश पासी , राजू गौतम , रवि गौतम, विपिन, खरीदें लाल पासी , संगीत रावत, देवेन्द्र सिंह, अनिल वर्मा,जय गोविंद रावत, बूटेलाल सहित सैकड़ों ग्रामीण रहे मौजूद ।

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