पुलिस का कर्तव्य पूरी तरह से नागरिक होना चाहिए, भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अन्तर्गत पुलिस राज्य का विषय है, इसलिए उत्तर प्रदेश राज्य सरकार का कर्तव्य बनता है कि पुलिसकर्मियों के बेहतरी के बारे मे विचार करे उत्तर प्रदेश पुलिस से केवल राजनीतिक लाभ न लिया जाए,
आवाज़ – ए – लखनऊ ; आर सी राठौर _ संपादक
उत्तर प्रदेश ; यह भारत देश का दुर्भाग्य है कि भारत में पुलिसकर्मियों को जो शोहरत, इज्जत मिलनी चाहिए थी वह नहीं मिली सर्वप्रथम ब्रिटिश-भारत मे 1786-93 मे गवर्नर- जनरल लार्ड कार्नवालिस ने, कलकत्ता,ढाका, पटना, तथा मुर्शिदाबाद में प्रत्येक जिले में एक पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति की। भारत के वर्तमान पुलिस विभागों की स्थापना सन् 1843 में हुई जब सर चार्ल्स नेपियर ने औपनिवेशिक आयरिश कांस्टेबुलरी की तर्ज पर सिंध में एक पुलिस प्रणाली की स्थापना की सन् 1857 में विद्रोह के पहले युद्ध के बाद ब्रिटिश,भारत सरकार सन् 1860 में एक पुलिस आयोग की स्थापना की, इसमें यह जानना दिलचस्प होगा कि आयोग का स्पष्ट निर्देश था कि पुलिस का कर्तव्य पूरी तरह से नागरिक होना चाहिए। भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अन्तर्गत पुलिस राज्य का विषय है, इसलिए उत्तर प्रदेश राज्य सरकार का कर्तव्य बनता है कि पुलिसकर्मियों के बेहतरी के बारे मे विचार करे उत्तर प्रदेश पुलिस से केवल राजनीतिक लाभ न लिया जाए, अगर उत्तर प्रदेश के पुलिसकर्मियों से बेहतर कार्य लेना है तो उन्हें राजनीति से मुक्त करना ही होगा,कोई भी पुलिसकर्मी राजनीतिक दबाव के चलते बेहतर ढंग से कार्य नहीं कर सकता।और निष्ठा से अपना कार्य नहीं कर पा रहा उसी के कारण कुछ पुलिस कर्मी अपनी ड्यूटी से भटक जाते जिसको आगे चलकर परेशानियों का सामना करना पड़ता है देखा गया कि हमारे ईमानदार पुलिसकर्मी पर धन उगाही का आरोप बहुत आसानी से लगा दिये जाते ये भी राजनीतिक का ही पहलू होता है अपने कार्य को बनाने के लिए पुलिस कर्मी को ही मोहरा बनाया जाता है

